Akbar birbal stories in hindi
बीरबल की खिचड़ी एक बार बादशाह ने बीरबल से पूछा- " बीरबल ! क्या हमारे राज्य में कोई ऐसा शख्स भी है जो सर्दियों की इस रात में पूरी रात पानी में खड़ा रह सके ? " जहांपनाह , ऐसे बहुत से लोग हैं । "
" मुझे विश्वास नहीं आता । " बादशाह बोले । विश्वास कीजिए , ऐसे बहुत से हैं जो धन पाने के लिए यह असम्भव कार्य भी करके दिखा सकते हैं । " हमारा ख्याल है कि नहीं । "
" मैं साबित कर सकता " ठीक है करो । " अगले दिन बीरबल एक धोबी को पकड़ लाए और बादशाह के समक्ष उपस्थित कर बोले " जहांपनाह ! यह आदमी इस कड़कती ठंड में भी पानी में खड़ा रह सकता है । "
" यदि इसने ऐसा कर दिखाया तो हम इसे बहुत इनाम देंगे । " " यह रात भर महल के पीछे यमुना जी में खड़ा रहेगा , कल आप इसे इनाम दे दीजिएगा । " बादशाह की स्वीकृति होने पर भारी इनाम के वाम्य में धोबी रात भर पानी में खड़ा रहा । बादशाह ने उस पर निगरानी रखवा दी । दूसरे दिन सुबह बीरबल उसे लेकर दरबार में पहुँचे । निगरान भी बादशाह को बता चुके थे कि धोबी पूरी ईमानदारी से पानी में खड़ा रहा । मगर न जाने क्यों अब बादशाह इनाम नहीं देना चाहते थे । अत : वे बोले-
" बीरबल , यह आदमी जल में कैसे खड़ा रहा ? "
" आप इसी से पूछिए । " " क्यों भई । तू रात भर इतनी ठण्ड में जल में कैसे खड़ा रहा ? सर्दी भी लगी होगी और दिल भी नहीं लगा होगा । रात कैसे कटी ? "
" हुजूर सारी रात मैं महल की छत पर जलते एक चिराग को देखता रहा । "
" ओह तुम हमारे चिराग की गर्मी के कारण सर्दी से बचते रहे , हाथ सेंकते रहे । "
" कैसी बात कर रहे हैं ? " जहांपनाह ! बीरबल बोला-
" कहीं यह संभव है कि छत पर जलते चिराग से इसे गर्मी पहुंचे । " बिल्कुल ! इसीलिए यह पानी में खड़ा रहा । नहीं , यह आदमी इनाम का हकदार नहीं है । इस प्रकार बादशाह का उस गरीब को इनाम न देना बीरबल को बुरा लगा । उसने आश्वासन देकर धोबी को तो भेज दिया , मगर मन ही मन सोच लिया कि बादशाह सलामत से उस गरीब को इनाम दिलाकर ही दम लेगा । दूसरे दिन उसने दरबार से छुट्टी मार ली । उसे अनुपस्थित देखकर बादशाह को चिन्ता हो गई कि उसका अजीज साथी क्यों नहीं आया ? कोई खैर -
खबर भी नहीं भेजी । अत : पता लगाने के उद्देश्य से बादशाह अकबर स्वयं बीरबल के निवास पर पहुंचे । वहां बीरबल जो तमाशा कर रहे थे उसे देखकर चौंक पड़े ।Akbar birbal stories in hindi
एक हांडी बंधी हुई थी । बीरबल ने जमीन पर एक लम्बा बांस गाड़ा हुआ था । जिसे ऊपर वाले सिरे पर जमीन पर बीरबल ने एक चिराग जला रखा था । " यह क्या कर रहे हो बीरबल ! " जुगाड़ कर रहा हूँ । "
" जहांपनाह ! कल से पेट कुछ गड़बड़ कर रहा है , उसे ही ठीक करने का " मगर यह कर क्या रहे हो ? " हमें तो ऐसा लगता है कि तुम बाजीगरी कर रहे हो ? " बाजीगरी नहीं जहांपनाह ! खिचड़ी पका रहा हूँ । खाकर दरबार में हाजिर होता हूँ । "
" खिचड़ी ? ऐसे पका रहे हो ? क्या बेवकूफी की बात करते हो ? हांडी आसमान में और आंग धरती पर । ऐसे भी कहीं खिचड़ी पकती है । हांडी तक तो धुआं भी नहीं पहुंचेगा ... आग की गर्मी की तो बहुत दूर की बात है , इसमें चावल , दाल भला कैसे गलेंगे । इसीलिए तो हमने कहा है कि तुम बाजीगरी कर रहे हो । "
" दाल - चावल भी गल जाएंगे जहांपनाह । "
" नहीं गलेंगे , कभी नहीं गलेंगे । यह कोरी मूर्खता है । "
" मूर्खता नहीं हुजूर । खिचड़ी पकाई जा रही है । "
" बीरबल ! तुम पागल तो नहीं हो गए हो ? "
" नहीं अन्नदाता ! खिचड़ी पका रहा हूँ । आप खुद ही सोचिए कि जब दो सौ गज दूर खड़ा आदमी महल की छत पर जलते चिराग से अपने शरीर में गर्मी महसूस कर सकता है तो कुछ गज ऊंचाई पर रखी इस हांडी में खिचड़ी क्यों नहीं पक सकती । पकेगी और जरूर पकेगी । आप दरबार में पहुंचे , मैं भी खिचड़ी खाकर हाजिर होता हूँ ।
" अब बादशाह मुस्कराए । पलक झपकते ही पूरी बात उनकी समझ में आ गई कि बीरबल ने यह नाटक क्यों किया । मुस्कराकर वे बोले-
" हम समझ गए बीरबल । तब भी हम समझते थे , मगर जानबूझ कर उस धोबी को इनाम नहीं दिया था । दरअसल हम देखना चाहते थे कि तुम क्या करिश्मा करके हमारा ध्यान उस तरफ खींचते हो । अब हमने देख लिया । तुम सचमुच बुद्धिमान हो । उस धोबी को कल मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा ।
" और अगले ही दिन बादशाह अकबर ने धोबी को दरबार में बुलाकर मुंह मांगा इनाम दिया । धोबी बहुत खुश हुआ और बादशाह तथा राजा बीरबल की जय - जयकार करता वहां से चला गया । गरीबों को इंसाफ और हक दिलाने के लिए बीरबल कुछ भी कर दिया करते थे ।Akbar birbal stories in hindi
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