" दूसरा बोला-
" हुजूर , सबसे प्यारे आप हैं । "
" सबसे प्यारी सन्तान होती है " मुल्ला दो प्याजा ने कहा । " दौलत से प्यार किसको नहीं है -
इससे हर चीज खरीदी जा सकती है । अत : इंसान दौलत से सबसे अधिक प्यार करता है ।
" सभी का उत्तर सुनकर बादशाह ने बीरबल की ओर देखा - बीरबल ने अभी तक कोई उत्तर नहीं दिया था । वे अभी भी खामोश बैठे सोच रहे थे । " बीरबल । " akbar birbal
" जहाँपनाह ! "
" तुमने कोई उत्तर नहीं दिया । " जहाँपनाह ! " सबसे प्यारी चीज़ होती है । जान । " बीरबल ने बताया । " नहीं हमें मुल्ला दो -
प्याजा का उत्तर जंच रहा है । इंसान हो या जानवर , उसके लिए अपनी संतान ही सबसे अधिक प्रिय है । "
" अपना - अपना ख्याल है जहाँपनाह ! मैंने ऐसे मंजर भी देखे हैं कि वक्त आने पर प्राणी संतान की भी परवाह नहीं करता और अपनी जान बचाता है । "
" सिद्ध कर सकते हो ? "
" जी हां , मैं सिद्ध कर सकता हूँ । " उधर मुल्ला दो - प्याजा यह सोचकर बेहद खुश था कि पहला मौका है जब बादशाह ने उसके जवाब को बीरबल से श्रेष्ठ बताया है । अत : वह इनाम और सम्मान पाने की कल्पना में खो गया । दूसरी ओर अपनी बात को सत्य सिद्ध करने के प्रयास में दूसरे दिन ही बीरबल ने किले के टैंक का पानी निकलवाकर उसे खाली कर दिया । उस खाली टैंक में एक बन्दरिया को छुड़वा दिया , जिसके पेट पर बच्चा चिपका हुआ था । फिर धीरे - धीरे उस टैंक में पानी छुड़वाना शुरू कर दिया । बंदरिया सूखे में खड़ी हो गयी , जोकि सबसे ऊँची जगह थी । जब उस ऊँची जगह में भी पानी आ गया और बन्दरिया के पेट पर चिपका बच्चा भीगने लगा तो बंदरिया ने उस बच्चे को पीठ पर लाद दिया । पानी भरता जा रहा था । बंदरिया बच्चे के लिए खड़ी रही । पानी तेजी से भर रहा था ।
जब पानी बंदरिया की पीठ तक भी आने लगा तो उसने बच्चे को सिर पर उठा लिया । पानी बढ़ता जा रहा था । यहाँ तक कि बंदरिया डूबने लगी । उसके सिर तक पानी पहुंच गया । उसके पैर भी उखड़ने लगे । तब उसने अपने आपको बचाने के लिए उस बच्चे को नीचे फैंक दिया और स्वयं बच्चे के ऊपर खड़ी हो गयी । यह देखकर बादशाह अकबर की आँखें खुल गईं । जिस बच्चे को बचाने के लिए वह कुछ देर पहले तक जी - जान से संघर्ष कर रही थी । अब अपनी जान पर बनी देखकर उसने उसी बच्चे को अपनी जान बचाने का माध्यम बना लिया । सच है जान है तो जहान है । वह मान गये कि सबसे प्यारी जान होती है । अपनी जान संकट में देख कोई भी प्राणी किसी की परवाह नहीं करता । बीरबल ने मुस्कराकर कहा-
" देखा आपने । "
" तुम्हारी बात सही है - बीरबल । "
" जहाँपनाह , संसार में हजारों में एक ऐसा होता है जो प्राणों की बाजी लगाकर किसी की प्राण रक्षा कर सकता है । अधिकांश तो ऐसे होते हैं जिन्हें अपनी जान की ही अधिक परवाह रहती है । ऐसे भी प्राणी हैं , जो भूख से अधिक पीड़ित होने पर संतान का ही भक्षण कर जाते हैं , कुछ प्राणी तो होते ही ऐसे हैं , अकाल पड़ने पर मनुष्य को भी मनुष्य का , अपनी संतान तक का भक्षण करते देखा गया है । इसीलिए मैंने कहा था कि सबसे प्यारी चीज अपनी जान है । "
" सच कहते हो । " ऐसा कहकर अकबर बादशाह ने अपने हाथ की अंगूठी बीरबल को देकर कहा-
" यह तुम्हारा इनाम । " यह देखकर मुल्ला - प्याजा के सीने पर सांप लोट गए । अगर बीरबल यह सब न करता तो इनाम की इस वेश - कीमती अंगूठी का अधिकारी वही होता । मगर अब पछताए का होत है ।akbar birbal
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